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Tuesday, 8 August 2017

पहले की तरह अब नहीं हो रहा है प्रॉपर्टी के वैल्‍यूएशन में अधिक इजाफा - living in rented house more beneficial buying home know how



नई दिल्लीः रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती का असर रेंटल मार्किट पर भी देखने को मिल रहा है. पिछले कुछ समय से जहां मकानों के रेट में कमी आई है वहीं मकान के किराया भी कम देने पड़ रहा है. आपको बता दें कि इस समय होम लोन के रेट में पिछले 7 साल के सबसे न्यूनतम स्तर पर है. ऐसे में आपके जहन में ये सवाल जरूर आएगा कि हम अपने घर के लिए किसी बैंक से होम लोने लें या फिर मकान किराए पर लेकर अपने पैसे बचाए. ऐसे में हम आपको बताते हैं कि आपको क्या करना चाहिए.  


अगर आप दिल्‍ली या नोएडा में 50-60 लाख रुपए का फ्लैट किराये पर लेते हैं तो आपको रेंट के रूप में प्रति महीने औसतन 12-15 हजार रुपए देने होंगे. वहीं अगर आप यही घर खरीदते हैं तो आपको 60 लाख रुपए की कीमत पर 12 लाख रुपए डाउन पेमेंट देने होंगे और बाकी 48 लाख रुपए आप बैंक से ले सकते हैं, जिस पर आपको लगभग 40-43 हजार रुपए के बीच मासिक ईएमआई देनी होगी. इस तरह एक ही फ्लैट के लिए आपको रेंट की तुलना में खरीदने की स्थिति में कई गुना अधिक रकम देनी होगी. ईएमआई पर रेपो रेट बढ़ने या कम होने का भी असर होगा.



बैंकों की ब्‍याज दरों में पिछले लगभग दो साल के दौरान औसतन 1.5 फीसदी की कमी आई है. एसबीआई ने तो 1.75 फीसदी तक की कमी की है. अगर किसी ने 20 साल के लिए 20 लाख रुपए का लोन ले रखा है तो मासिक ईएमआई पर लगभग 2000 रुपए तक की बचत हो रही है और साल में लगभग 24 हजार रुपए बच जाएंगे.



हाल के वर्षों के ट्रेंड को देखते हुए कहा जा सकता है कि पहले की तरह अब प्रॉपर्टी के वैल्‍यूएशन में अधिक इजाफा नहीं हो रहा है. पहले 4-5 साल में वैल्‍यूएशन दो गुना हो जाता था, अब 10 साल में दोगुना होने का दावा भी नहीं किया जा सकता है.



अगर आप महज 45 हजार रुपए मासिक रूप में 10 साल तक एसआईपी में डालते हैं तो अगले 10 साल में अनुमानित रूप से 12 फीसदी ग्रोथ के साथ यह रकम 1 करोड़ रुपए से भी अधिक हो सकती है. अगर आपकी प्रॉपर्टी की वैल्‍यू में इस दौरान 2.5 गुना की वृद्धि होती है, तब जाकर ही आप एसआईपी के बराबर पहुंच पाएंगे, जो वर्तमान स्थिति को देखकर संभव नहीं लगता.


आज के युवा जिस तरह की जॉब करते हैं, उसमें जगह की कोई निश्चितता नहीं रहती है. आज कोई दिल्‍ली में तो कल बेंगलुरु, मुंबई या विदेश के किसी शहर में काम कर सकता है. दिल्‍ली जैसा शहर भी इतना बड़ा कि एक कोने से दूसरा कोना जाने में काफी समय लग जाता है. जबकि एक जगह फ्लैट ले लेने से उस जगह के प्रति एक तरह का आग्रह डेवलप कर जाता है. इसका बुरा असर करियर की संभावनाओं पर होता है.


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