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Sunday, 17 September 2017

सरदार सरोवर बांध परियोजना इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है: पीएम नरेंद्र मोदी - sardar sarovar dam is merical of engineering pm modi



अहमदाबाद: पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया. इस बांध के उद्घाटन के बाद एक रैली में पीएम मोदी ने कहा कि इस परियोजना से सिर्फ गुजरात नहीं बल्कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान के किसानों के भाग्य भी बदलेंगे. उन्होंने कहा कि यह किसी पार्टी की परियोजना नहीं है. उन्होंने कहा कि सरदार सरोवर बांध की राह में कई अड़चनें आईं, लेकिन हम इस बात को लेकर दृढ़संकल्प थे कि परियोजना चालू रहेगी. पीएम मोदी ने कहा कि वर्ल्ड बैंक ने इसके लिए पैसे देने से मना कर दिया था, लेकिन हम नहीं रुके. पीएम मोदी ने कहा कि इस परियोजना के खिलाफ गलत जानकारियों को आधार बनाकर मुहिम छेड़ी गई थी, जबकि यह परियोजना इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है.



पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद सरदार साहब (सरदार वल्लभ भाई पटेल) को उतना श्रेय नहीं मिला, जितने के वह हकदार थे, भले ही कारण कुछ भी रहे हों. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया की किसी अन्य परियोजना के समक्ष कभी इतने अवरोध नहीं आए, जितने कि नर्मदा पर बने सरदार सरोवर बांध के सामने आए. पानी की कमी विकास की गति को धीमा करने का एक बड़ा कारक है. हमने बांध से पानी भारत-पाक सीमा पर हमारे बीएसएफ के जवानों तक पहुंचाया है.


पीएम मोदी ने कहा, आज हम दो महापुरुषों को खास तौर पर याद कर रहे हैं, जिन्होंने मंत्री के रूप में सिंचाई और जलस्रोतों को बहुत महत्व दिया.

'लौह पुरुष' सरदार वल्लभाई पटेल ने गुजरात में सिंचाई के संकट को देखते हुए नर्मदा पर बांध बनवाने की योजना बनाई थी तथा आजादी के पहले ही 1946 में उन्होंने अंतरिम सरकार में आने के बाद इस परियोजना के लिए अध्ययन करवाया. 1959 में बांध के लिए औपचारिक प्रस्ताव बना.5 अप्रैल, 1961 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी. राज्यों के बीच विवाद होने पर गुजरात एवं मध्य प्रदेश के बीच नवंबर 1963 में समझौता हुआ तथा सितंबर 1964 में डॉ एएन खोसला ने अपनी रिपोर्ट सौंपी.


जुलाई 1968 में गुजरात ने अंतर-राज्यीय जल विवाद कानून के तहत पंचाट गठित कराने की मांग की. अक्टूबर, 1969 में नर्मदा जल विवाद पंचाट बना.12 जुलाई, 1974 को गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात के बीच बांध को लेकर समझौता हुआ. 12 सितंबर, 1979 को पंचाट का अंतिम निर्णय.अप्रैल, 1987 में बांध निर्माण का ठेका दिया गया. 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने बांध की ऊंचाई 80.3 मीटर से अधिक करने पर रोक लगाई.1998-99 में बांध को 85 मीटर तक ऊंचा बनाने की अनुमति दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर, 2000 में परियोजना के चरणबद्ध तरीके से तेजी से निर्माण की अनुमति दी. 2001 में बांध की ऊंचाई 90 मीटर कर दी गई.जून, 2004 तक बांध की ऊंचाई 110.4 मीटर की गई.


8 मार्च, 2006 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने बांध की उंचाई बढ़ाकर 121.92 मीटर करने की अनुम​ति दी. मार्च, 2008 में बांध से निकलने वाली मुख्य नहर राजस्थान तक पहुंची. 12, जून 2014 को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने बांध को पूरी ऊंचाई तक बनाने एवं गेट लगाने की अनुमति दी. 10 जुलाई, 2017 को बांध के सभी 30 गेट लगाए गए. सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी, 2017 को परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के काम को तीन माह में पूरा करने का निर्देश दिया. सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरदार सरोवर नर्मदा बांध परियोजना का लोकार्पण


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