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Tuesday, 30 January 2018

सुप्रीम कोर्ट से बिहार के 3.7 लाख नियोजित टीचरों के लिए राहत की खबर - supreme court direct to nitish kumar govt equal salary for contract teachers



पटना/नई दिल्ली: बिहार के 3.7 लाख नियोजित टीचरों के लिए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत की खबर आई. सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि समान काम के लिए समाज वेतन दिया जाए. जस्टिस एके गोयल और जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार की 11 याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया कि वह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाए और कमेटी इन टीचरों की योग्यता के आधार पर सैलरी स्ट्रक्चर तय करे.


कोर्ट ने कमेटी से चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट अब मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को करेगा. बिहार सरकार की ओर से वकील गोपाल सिंह, मनीष कुमार, मुकुल रोहतगी, गोपाल सुब्रमण्यम ने पैरवी की. वहीं नियोजित टीचरों की ओर से वरिष्ठ वकील अमरेंद्र शरण व अन्य ने पैरवी की.




दरअसल, बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाएं दायर कर पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें एक समान कार्य के लिए एक समान वेतन देने का आदेश किया था. आपको बता दें कि इन टीचरों को समान वेतन देने का फैसला पटना हाईकोर्ट ने 31 अक्टूबर 2017 को दिया था. राज्य सरकार की ओर से इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 15 दिसंबर को विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी. हालांकि बिहार माध्यमिक टीचर संघ समेत कई टीचर संगठनों ने इससे पहले से ही कैविएट फाइल कर रखी थी.



सुप्रीम कोर्ट में नियोजित टीचरों की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि ऐसे टीचर सरकारी टीचरों के बराबर काम करते हैं. नियोजित टीचरों की सेवा शर्त, सैलरी आदि राज्य सरकार ही तय करती है. चूंकि दोनों टीचर एक तरह के काम करते हैं, ऐसे में समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए. समान काम के लिए समान वेतन न देना गैर संवैधानिक है. नियोजित टीचरों की ओर से कहा गया कि समान वेतन देने पर राज्य सरकार को 9,800 करोड़ रुपये अतिरिक्त आर्थिक भार आएगा. साथ ही यह भी दलील दी गई कि टीचरों पर होने वाले खर्च में से 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देती है. राज्य सरकार केंद्र के फंड को भी खर्च नहीं करती.



इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह राज्य को शिक्षा के मद में जो फंड आवंटित करते हैं, उसका ब्योरा पेश करें. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन साथ ही राज्य के चीफ सेक्रटरी को एक कमिटी बनाने के लिए कहा है, ताकि इस बात का आंकलन किया जा सके कि नियोजित टीचरों को नियमित सरकारी टीचरों के बराबर वेतन के भुगतान से राज्य सरकार पर कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ आएगा.


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