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Friday, 5 January 2018

राज्‍यसभा अनिश्चितकाल तक के लिए स्‍थगित, लटक गया तीन तलाक बिल - triple talaq bill government last chance in rajya sabha



राज्‍यसभा शुक्रवार को अनिश्चितकाल तक के लिए स्‍थगित हो गई है. इसके चलते में तीन तलाक बिल लटक गया हे. इतना ही नहीं जीएसटी संशोधन बिल भी राज्‍यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल तक के लिए स्‍थगित होने के चलते लटक गया है. सभापति ने गतिरोध खत्‍म करने के लिए सरकार और विपक्ष की बैठक बुलाई थी जो बेनतीजा रही.


सभापति की बैठक में सरकार की तरफ से अरुण जेटली और कांग्रेस के कई वरिष्‍ठ नेता मौजूद थे. सूत्रों का कहना है कि सरकार की तरफ से सेलेक्‍ट कमेटी में कोई सदस्‍य मौजूद नहीं था जिसके चलते वह इसका विरोध कर रही थी. अब तीन तलाक बिल पर कोई फैसला 30 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र में होगा.


वहीं इससे पहले संसदीय कार्यमंत्री अंनत कुमार ने कहा था कि सरकार मुस्लिम समाज और बहनों के साथ है. समाज के अन्‍य कानून की तरह कानून बनना चाहिए लेकिन कांग्रेस इस बिल को लेकर दोहरा रवैया अख्तियार कर रही है. वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बीजेपी जो सीधा है उसे उल्‍टा बनाने में लगी है. उन्‍होंने कहा कि वह बिल का समर्थन में हैं और सरकार उसकी कमियों को दूर करेंगी तो वह इसके साथ जाने को तैयार हैं.



गुरुवार को भी इस मुद्दे पर संसद में जमकर हंगामा हुआ जिसके बाद कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा. विपक्ष का कहना है कि वो भी महिलाओं का सशक्तिकरण चाहते हैं लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. अगर आज बिल पास नहीं हुआ तो इसे संसदीय समिति के पास भेजा जा सकता है.

विपक्ष गुरुवार को भी राज्यसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017 को फौजदारी अपराध घोषित करने के प्रावधान वाले विधेयक को सेलेक्‍ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग पर अड़ा रहा. कांग्रेस के आनंद शर्मा तथा तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर रॉय द्वारा विधेयक पर दो संशोधन प्रस्तावों पर नेता सदन अरुण जेटली ने आपत्ति दर्ज की। इस पर विपक्ष विधेयक को सेलेक्‍ट कमेटी में भेजने के प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग पर अड़ा रहा.



इससे पहले जेटली ने सदन संचालन संबंधी नियमों के हवाले से कहा कि किसी भी संशोधन प्रस्ताव को पेश करने से एक दिन पहले इसका नोटिस देना अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने विपक्ष द्वारा सुझाये गये प्रवर समिति के सदस्यों के नामों के बारे में कहा कि ये सदन का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

इस दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने स्पष्ट किया कि उनका दल तीन तलाक विधेयक के विरोध में नहीं है बल्कि इसमें मुस्लिम महिलाओं के हितों की अनदेखी किये जाने के खिलाफ हैं. आजाद ने कहा कि अगर विधेयक में तीन तलाक से पीड़ित महिला के पति की सजा के दौरान उसके और उसके बच्चों के भरण पोषण के इंतजाम से जुड़े प्रावधान शामिल किये जायें या सरकार इस जिम्मेदारी को वहन करे, तो उनकी पार्टी विधेयक को पूरा समर्थन करने के लिये तैयार हैं.



इस बीच विपक्ष द्वारा पेश दो संशोधन प्रस्तावों पर जेटली के तर्क सुनने के बाद उपसभापति पी जे कुरियन ने व्यवस्था देते हुये कहा कि दोनों प्रस्ताव सभापति की पूर्व मंजूरी के बाद पेश किये गये हैं इसलिये ये सदन की संपत्ति हैं और सदन ही इस पर कोई फैसला कर सकता है। सत्तापक्ष द्वारा विधेयक पर चर्चा कराने पर सदन में आमराय न बनते देख उपसभापति ने कार्यसूची के मुताबिक जीएसटी विधेयक पर चर्चा शुरू करने को कहा.


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